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श्री शङ्कराचार्य विरचित – अर्द्धनारीश्वर शिव स्तोत्र (Ardhnarishwar Shiva Stotra)

Pt. Ram Chandra 7 वर्ष ago
Shiv Parvati Ardhnariteshwar

अर्द्धनारीश्वर शिव स्तोत्र के पाठ से निम्नलिखि लाभ प्राप्त होता है
अर्द्धनारीश्वर शिव स्तोत्र पाठ बहुत ही फलदायी पाठ है
सभी समस्याओं का समाधान है अर्द्धनारीश्वर शिव स्तोत्र का पाठ ।
यह पाठ करने सभी तरह की मनोकामनाओं को पूरा करता है।
इस स्तोत्र को सोमवार के दिन पाठ करने से भगवन भोलेनाथ प्रसन्न होते ह।
इस स्तोत्र का पाठ करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से भाग्य का दरवाजा खुल सकता है।

॥ अर्द्धनारीश्वर शिव स्तोत्र (Ardhnarishwar Shiv Stotra)॥

चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय ।
धम्मिल्लकायै च जटाधराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ १ ॥

कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै चितारजः पुंजविचर्चिताय ।
कृतस्मरायै विकृतस्मराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ २ ॥

चलत्क्वणत्कंकणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणीनूपुराय ।
हेमांगदायै भुजगांगदाय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ३ ॥

विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपंकेरुहलोचनाय ।
समेक्षणायै विषमेक्षणाय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ४ ॥

मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालांकितकन्धराय ।
दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ५ ॥

अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय ।
निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ६ ॥

प्रपंचसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय ।
जगज्जनन्यैजगदेकपित्रे नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ७ ॥

प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय ।
शिवान्वितायै च शिवान्विताय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ८ ॥

एतत् पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी ।
प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात् सदा तस्य समस्तसिद्धि: ॥ ९ ॥

॥ इति आदिशंकराचार्य विरचित अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥


अर्द्धनारीश्वर शिव स्तोत्र का हिंदी अर्थ (Hindi Meaning of Ardhnarishwar Shiv Stotra)

चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय

जो शरीर की आधी भाग मोती के समान गोरा है और दूसरी भाग कर्पूर (कपूर) के समान गोरा है।

धम्मिल्लकायै च जटाधराय नम: शिवायै च नम: शिवाय

जो जटाओं वाला है और धूल और धूलि से धूंधला है, उस शिव को नमस्कार करता हूं।

कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै चितारजः पुंजविचर्चिताय

जिसका शरीर कस्तूरी और कुंकुम से सजा हुआ है, और जिसकी प्रशंसा पुंजवी (गुलाब) की तरह होती है।

कृतस्मरायै विकृतस्मराय नम: शिवायै च नम: शिवाय

जिसकी यादें स्वयं ही बनी हुई हैं और विकृति से याद की गई हैं, उस शिव को नमस्कार करता हूं।

चलत्क्वणत्कंकणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणीनूपुराय

जिसके पैरों में चमकते हुए घुंघराले हैं, और पादुकाओं के नामों में राजत (चाँदी) और फणी (स्वर्ण) के नाम हैं।

हेमांगदायै भुजगांगदाय नम: शिवायै च नम: शिवाय

जिसके हाथों में सोने के बाजूबंद और हाथी की बांह के बाजूबंद हैं, उस शिव को नमस्कार करता हूं।

विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपंकेरुहलोचनाय

जिसकी आँखें विशाल और नीली कमल के फूलों की भाँति हैं, और जिनके दृष्टि के फुलवारे खिले हैं।

समेक्षणायै विषमेक्षणाय नम: शिवायै च नम: शिवाय

जिनकी दृष्टि समझ से बाहर है, उन शिव को नमस्कार करता हूं।

मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालांकितकन्धराय

जिनके गले पर मन्दार माला लपेटी हुई है और जिनके कंधों पर कपाल माला सजी हुई है।

दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नम: शिवायै च नम: शिवाय

जो दिव्यांग वस्त्र पहने हुए हैं और जो नग्न (नंगे) हैं, उस शिव को नमस्कार करता हूं।

अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय

जिनके केश अम्बर के जैसे और काले हैं, और जिनके बाल सूर्य की किरणों के समान प्रकाशित हैं।

निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नम: शिवायै च नम: शिवाय

जो सबसे निरीश्वर (ईश्वर के बिना) हैं और जो सबके ईश्वर हैं, उस शिव को नमस्कार करता हूं।

प्रपंचसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय

जो प्रपञ्च (संसार) की सृष्टि की दिशा में हैं और जो समस्त संहार की ताण्डव नृत्य करते हैं।

जगज्जनन्यैजगदेकपित्रे नम: शिवायै च नम: शिवाय

जो सब की जननी हैं और जो जगत् के एकमात्र पिता हैं, उस शिव को नमस्कार करता हूं।

प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय

जिनकी कुंडलियाँ प्रकाशमय हैं और जिनके मणियों से भरे हुए शेषनाग के बूटे हुए हैं।

शिवान्वितायै च शिवान्विताय नम: शिवायै च नम: शिवाय

जो शिव से युक्त हैं और जो शिव से युक्त होकर ही शिव हैं, उस शिव को नमस्कार करता हूं।

एतत् पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी

जो इस अष्टक श्लोक का पाठ करता है, वह भक्ति से युक्त होकर संसार में मान्य और लम्बे जीवनी होता है।

प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात् सदा तस्य समस्तसिद्धि:

जो सौभाग्य (भग्य) को प्राप्त करता है, उसका अनंतकाल तक सौभाग्य रहता है और उसे हमेशा समस्त सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।


शिव (Shiva) बिना शक्ति (Shakti) के शव समान है। शिव (Shiva) और शक्ति एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। जिस प्रकार सूर्य और प्रकाश अलग नहीं किया जा सकता वैसे ही शिव (Shiva) और शक्ति (Shakti) को अलग नहीं किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार शिवा (Shiva) और शक्ति (Shakti) एक दूसरे के बिना शक्तिहीन हैं। इस अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र / स्तुति (Stotra) की करने से शिव-शक्ति (Shiva-Shakti) की संयुक्त कृपा प्राप्त होती हैं ।

शिव महापुराण में उद्धृत है “शंकर: पुरुषा: सर्वे स्त्रिय: सर्वा महेश्वरी ।” अर्थात्– समस्त पुरुष भगवान शंकर (Shankar) के अंश और समस्त स्त्रियां भगवती (Bhagwati) की अंश हैं, उन्हीं भगवान (Bhagawan) अर्धनारीश्वर (अर्धनारीनटेश्वर) (Ardhnarishwara) से ही इस समग्र चराचर (universe) का निर्माण हुआ है ।

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Tags: parvati Shiv

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