शिव रूद्राष्टकम स्तोत्र (Shiv Rudrashtakam Stotra)
भगवान शिव के अनेक स्तोत्रों में एक विशेष स्तोत्र है शिव रुद्राष्टक (Shiv Rudrashtakam)। जो भी मानव इस विशेष स्तोत्र का नियमित सश्वर श्रद्धापूर्वक पाठ करता है उस पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। रामचरित मानस से लिया गया इस स्तोत्र को नियमियत पाठ कर मनुष्य सभी प्रकार के दुःख, दारिद्र और बाधा से निजात पा सकता है। यह शिव स्तोत्र शीघ्र फल देने वाला माना जाता है। शिव जी का एक नाम आशुतोष भी है जिसका मतलव होता है शीघ्र प्रसन्न होने वाला। शिव शीघ्र प्रसन्न होनेवाले देवता हैं, और यह स्तोत्र और भी त्वरित खुश कर देता है भोले नाथ को।
शिव रूद्राष्टकम स्तुति (Shiv Rudrashtakam Stuti)
नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥
चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥
प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥
न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥
रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।।
शिव रूद्राष्टकम स्तोत्र का महत्व व लाभ
शिव रुद्राष्टक स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक, आध्यात्मिक, और शारीरिक लाभ प्राप्त होता है। यह आराधना स्तोत्र महादेव शिव के गुणों, महत्त्व, और प्रतिभाव का वर्णन करता है, जो ध्यान में लेकर उसके प्रशंसकों को आत्म-संयम, स्थिरता, और भक्ति में वृद्धि करता है।
- मनोशांति और आत्म-संयम: शिव रुद्राष्टक स्तोत्र के पाठ से मानसिक चंचलता कम होती है और मन को शांति मिलती है। यह आत्म-संयम और ध्यान को स्थायित करने में सहायक होता है।
- रोग निवारण और स्वास्थ्य का संरक्षण: शिव रुद्राष्टक स्तोत्र के पाठ से रोग निवारण के लिए शक्ति प्राप्त होती है और व्यक्ति का स्वास्थ्य सुधरता है।
- संघर्षों का समाधान: महादेव के इस स्तोत्र का पाठ करने से संघर्षों और संकटों का समाधान होता है और व्यक्ति को स्थिरता और सहारा प्राप्त होता है।
- आत्मिक विकास और भक्ति की वृद्धि: शिव रुद्राष्टक स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति का आत्मिक विकास होता है और भक्ति में वृद्धि होती है। यह भगवान शिव के प्रति श्रद्धा को बढ़ाता है और उसके साथ संबंध को मजबूत करता है।
इस प्रकार, शिव रुद्राष्टक स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक और मानसिक विकास होता है और वह अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन महसूस करता है।
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