Dwadash Lingam
इस छोटे से शिव स्तोत्र – द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (Dwadash Jyotirlinga Stotra) को सुबह शाम पढ़ने मात्र से सात जन्मों का पाप कटित होता है। चार पंक्तियों के द्वादश ज्योतिर्लिंग (Dwadash Jyotirlinga) स्तोत्र में बताया गया है कि किस जगह पर है शिव के 12 ज्योतिर्लिङ्ग हैं जिसके स्मरण मात्र से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है ।
छोटा सा शिव स्तोत्र – द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (Dwadash Jyotirlinga Stotra) जो सुबह, दोपहर और शाम को पाठ करने पर सात जन्मों के पापों से निवारण करता है। इसमें शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है, जिन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग (Dwadash Jyotirlinga) कहा जाता है। इन ज्योतिर्लिंगों के स्मरण से माना जाता है कि मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
ज्योतिर्लिंगों के नामांकन का इतिहास प्राचीन है और इन्हें भारतीय धर्म और संस्कृति में विशेष महत्व दिया जाता है। इन ज्योतिर्लिंगों का सम्बन्ध शिवजी के महत्वपूर्ण स्थानों से होता है और भक्तों के लिए इनका दर्शन करना एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य माना जाता है। शिव स्तोत्र का पाठ करने से भक्त शिवजी के आशीर्वाद को प्राप्त करते हैं और अपने जीवन को धार्मिक दृष्टिकोण से समृद्ध करते हैं।
इस छोटे से स्तोत्र का मान्यतानुसार पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली अनिष्ट घटनाओं का निवारण होता है और उन्हें शिव की कृपा प्राप्त होती है। इसलिए भक्त नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करते हैं ताकि उन्हें धार्मिक और मानसिक शांति मिले और उनका जीवन समृद्धि से भरा हो।
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (Dwadash Jyotirlinga Stotra)
स्तोत्र :-
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति।
कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वराः॥:
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का अर्थ
सोमनाथ सौराष्ट्र में है और श्रीशैल में मल्लिकार्जुन उज्जैन में महाकालेश्वर और अमलेश्वर में ओम्कारेश्वर ||
परली के निकट बाबा वैद्यनाथ और डाकिनी के चोटी पर भीमशंकर , सेतुबंध के निकट रामेश्वरम और दारुकावन में है नागेश्वर ||
वाराणसी में बाबा विश्वनाथ गोतमी के तट पर त्रयम्बकेश्वर , हिमालय में केदारनाथ और शिवालय(शिवार ) में घुश्मेश्वर ||
जो भी नर (मनुष्य ) सुबह शाम इसका पाठ करता है , उसका इस स्मरण मात्र से सात जन्मो का पाप धूल जाता है ||
| ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) | स्थान (Place) |
| सोमनाथ (Someshwar) | सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple), सौराष्ट्र क्षेत्र, गुजरात भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला और प्रमुख ज्योतिलर्लिंग सोमनाथ गुजरात में प्रभास पाटन, वेरावल में स्थित है। यह अहमदाबाद से लगभग 400 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में, जूनागढ़ से 82 किलोमीटर दक्षिण में है। यह वेरावल रेलवे जंक्शन से लगभग 7 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में, पोरबंदर हवाई अड्डे से लगभग 130 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में और दीव (Diu) हवाई अड्डे से लगभग 85 किलोमीटर पश्चिम में है। |
| श्रीशैल श्रीमल्लिकार्जुन (Mallikarjun) | श्रीशैलम (श्री सैलम), आंध्र प्रदेश श्रीशैलम मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है जहाँ भगवान शिव और पार्वती दोनों विराजमान है। यह भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित है। यह शैव और शक्ति दोनों हिंदू संप्रदायों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मंदिर में शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महत्वपूर्ण ज्योतिलर्लिंग मल्लिकार्जुन विराजमान हैं वहीँ दूसरी ओर हिंदू देवी के अठारह शक्तिपीठ भी स्थित है। यहाँ शिव की मल्लिकार्जुन स्वरुप में पूजा की जाती है और उनकी पत्नी पार्वती को भ्रमरम्बा के रूप में विराजमान हैं । |
| महाकालेश्वर (Mahakaleshwar) | श्री महाकाल, महाकालेश्वर, उज्जयिनी (उज्जैन) |
| ॐकारेश्वर (Omkareshwar) | ॐकारेश्वर अथवा ममलेश्वर, ॐकारेश्वर |
| बैद्यनाथ (Baidyanath) | देवघर झारखण्ड |
| भीमाशंकर (Bhimashankar) | भीमाशंकर मंदिर, निकट पुणे, महाराष्ट्र |
| रामेश्वरम (Rameshwar) | रामेश्वरम मंदिर, रामनाथपुरम, तमिल नाडु |
| नागेश्वर (Nageshwar) | औंढा नागनाथ महाराष्ट्र नागेश्वर मन्दिर, द्वारका, गुजरात |
| विश्वनाथ (Vishwanath) | काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
| त्र्यम्बकेश्वर (Trimbakeshwar) | त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर, नासिक, महाराष्ट्र |
| केदारनाथ (Kedar Nath) | केदारनाथ मन्दिर, रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड |
| घृष्णेश्वर (Grushneshwar) | घृष्णेश्वर मन्दिर, वेरुळ, औरंगाबाद, महाराष्ट्र |
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