Bilvashtakam
बिल्वाष्टकम् स्तोत्रम् (त्रिदलं त्रिगुणाकारं)
जब कोई भक्त शुद्ध अंतर्मन से भगवान भोलेनाथ को स्मरण करता है, तो किसी भी मंत्र की आवश्यकता नहीं होती — बिल्वाष्टकम् स्तोत्र (Bilvashtakam Stotram) के साथ एक बिल्वपत्र समर्पित कर भगवन शिव को खुश किया जा सकता है।
बिल्वाष्टकम् स्तोत्र वह स्तुति है जिसमें शिव को बिल्वपत्र अर्पण करने का तरीका और उससे होने वाले लाभ का जिक्र है।
यह स्तोत्र न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में बिल्वपत्र का शिवार्पण के लिए उपयोग किया जाता है, बल्कि आत्मा को शुद्ध और शांति प्रदान करता है।
इसमें बताया गया है कि यह एक छोटा सा बिल्वपत्र यदि श्रद्धा से शिव को समर्पित किया जाए, तो वह तीन जन्मों के पापों का हरण कर सकता है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है, बल्कि सनातन भक्ति के श्रद्धा की शक्ति को उद्धृत करता है।
जब हम ‘एकबिल्वं शिवार्पणम्’ उच्चारित करते हैं, तो वह केवल एक मंत्र नहीं होता — वह हमारे अहंकार का विसर्जन, और ईश्वर के प्रति समर्पण है।
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Tridalam trigunakāram trinetram cha trayāyudham।
Trijanma pāpa saṁhāram ekabilvam Shivārpaṇam॥
अर्थ (हिंदी में):
तीन पत्तों वाला यह बिल्वपत्र भगवान शिव को अर्पित है — जो स्वयं तीन गुणों (सत्त्व, रज, तम) से परे हैं, जिनकी तीन आँखें हैं, और जो तीन प्रकार के शस्त्र धारण करते हैं। यह पत्र तीन जन्मों के पापों का नाश करने वाला है।
त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अचिद्रैः सुभगैः शुभैः।
वृन्तयुक्तैः सदा देव एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Trishākhaiḥ bilvapatraishcha achidraiḥ subhagaiḥ shubhaiḥ।
Vr̥ntayuktaiḥ sadā deva ekabilvam Shivārpaṇam॥
अर्थ:
हे देव! यह पवित्र बिल्वपत्र तीन शाखाओं वाला, बिना किसी कटाव के, और डंठल सहित है। ऐसा उत्तम पत्र आपको समर्पित है। यह पत्र शुभ फल देने वाला है।
एकव्रुण्डं दशपत्रं शुद्धं पूर्णं शिवार्पणम्।
कर्पूरगौरं करुणावतारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Ekavr̥uṇḍaṁ daśapatraṁ śuddhaṁ pūrṇaṁ śivārpaṇam।
Karpūra-gauraṁ karuṇā-avatāraṁ ekabilvaṁ Shivārpaṇam॥
अर्थ:
यह एक डंठल से जुड़ा हुआ दस पत्तों वाला पवित्र बिल्वपत्र पूर्ण रूप से निर्मल है। मैं इसे उस शिव को अर्पित करता हूँ जो चन्दन जैसे श्वेत हैं और करुणा के मूर्तरूप हैं।
शिवस्य पूजनार्थं तु बिल्वपत्रं विशेषतः।
अतस्तदर्पणं देव एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Shivasya pūjanārthaṁ tu bilvapatraṁ viśeṣataḥ।
Atastad-arpaṇaṁ deva ekabilvaṁ Shivārpaṇam॥
अर्थ:
भगवान शिव की पूजा में बिल्वपत्र का विशेष महत्व है, इसलिए मैं यह एक बिल्वपत्र श्रद्धा से अर्पित करता हूँ।
लक्ष्मीस्तनुतुल्यानी बिल्वपत्राणि पातयेत्।
शिवपूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Lakṣmī-stana-tulyāni bilvapatrāṇi pātayet।
Shivapūjāṁ kariṣyāmi ekabilvaṁ Shivārpaṇam॥
अर्थ:
जो बिल्वपत्र माँ लक्ष्मी के उरोजों जैसे कोमल और सुंदर हैं, उन्हें शिव की पूजा में अर्पित करना चाहिए। मैं भी ऐसा ही एक पत्र समर्पित करता हूँ।
दारिद्र्यं शोकदुःखानि तस्मात्क्षयमुपागता।
शिवनाम्ना सदा पुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Dāridryaṁ śoka-duḥkhāni tasmāt kṣayam-upāgatā।
Shivanāmnā sadā puṇyaṁ ekabilvaṁ Shivārpaṇam॥
अर्थ:
शिवनाम का उच्चारण और बिल्वपत्र अर्पण करने से दरिद्रता, दुःख और शोक समाप्त हो जाते हैं। मैं पुण्य प्राप्ति के लिए यह एक बिल्वपत्र अर्पित करता हूँ।
अखण्डबिल्वपत्रं यः शिवलिंगे निवेदयेत्।
शत्रुघ्नं पापनाशं च एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Akhaṇḍa-bilvapatraṁ yaḥ Shivalinge nivedayet।
Śatrughnaṁ pāpa-nāśaṁ cha ekabilvaṁ Shivārpaṇam॥
अर्थ:
जो व्यक्ति अखण्ड (कटा-फटा नहीं) बिल्वपत्र शिवलिंग पर चढ़ाता है, उसे शत्रु नाश और पाप विनाश का फल प्राप्त होता है। ऐसा ही एक पत्र मैं समर्पित करता हूँ।
सहस्रवर्तनं पापं सम्यगाचरतोऽपि वा।
एकबिल्वं शिवार्पणं मुच्यते सर्वपातकात्॥
Sahasravartanaṁ pāpaṁ samyag-ācharato’pi vā।
Eka-bilvaṁ Shivārpaṇaṁ muchyate sarva-pātakāt॥
अर्थ:
हजारों बार किए गए पाप भी यदि किसी ने धर्मपूर्वक बिल्वपत्र अर्पित किया हो, तो मिट जाते हैं। ऐसा प्रभावशाली है यह शिव को समर्पित बिल्वपत्र।
बिल्वाष्टकं इदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
Bilvāṣṭakaṁ idaṁ puṇyaṁ yaḥ paṭhech-chiva-sannidhau।
Shivalokam-avāpnoti ekabilvaṁ Shivārpaṇam॥
अर्थ:
जो श्रद्धालु यह बिल्वाष्टक स्तोत्र भगवान शिव के समक्ष पढ़ता है, वह अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है। मैं भी श्रद्धा से यह एक बिल्वपत्र अर्पित करता हूँ।
