हिन्दू धर्म में माता दुर्गा की पूजा या आराधना का विशेष महत्व है। ये सभी मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रसस्त हैं। जैसा की हम जानते हैं भक्त माता को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं एवं विभिन्न स्तुति, चालीसा, मन्त्र, आरती इत्यादि का पाठ करते हैं। ऐसे में इस “आरती श्री दुर्गाजी – अम्बे तू है जगदम्बे काली (Durga Aarti-Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)” का सश्वर पाठ करते हुए माता की आरती करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। आप चाहे जागरण या जगराता या माता रानी का व्रत कुछ भी करें , माता के आरती के समय इस “आरती श्री दुर्गाजी – अम्बे तू है जगदम्बे काली (Durga Aarti-Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)” का पाठ अनिवार्य रूप से करें।
आरती श्री दुर्गाजी – अम्बे तू है जगदम्बे काली (Durga Aarti-Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से है बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
मैया भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
दुर्गा माता से संबंधित अन्य उपयोगी लिंक निम्नलिखित है:-
- दुर्गा आरती – जय अम्बे गौरी (Durga Aarti – Jai Ambe Gauri)
- श्री दुर्गा चालीसा – Durga Chalisa
- नवरात्रि, दुर्गा पूजा और नवदुर्गा (Navratri, Durga Puja, Navdurga)
- माँ दुर्गा पूजा और व्रत की सरल विधि (Durga Puja Vrat Ki Vidhi)
- शैलपुत्री (Shailputri)
- ब्रह्मचारिणी (Brahm Charini)
- चन्द्रघंटा (Chandra Ghanta)
- कूष्माण्डा (Kushmanda)
- स्कंदमाता (Skand Mata)
- कात्यायनी (Katyayani)
- कालरात्रि (Kalaratri)
- महागौरी (Maha Gauri)
- सिद्धिदात्री (Siddhidatri)
हिन्दू धर्म और देवी दुर्गा
दुर्गा माता हिन्दू धर्म के एक प्रमुख और लोकप्रिय देवी हैं। यह आदि शक्ति हैं जो अंधकार एवं अज्ञानता रूपी दानव से रक्षा करने के लिए पृथ्वी पर दुर्गा रूप में अवतरित हुईं थीं। यह अत्यंत कल्याणकारी मानी गयी हैं इनकी पूजा से मनुष्य की सभी विघ्न बाधाएं दूर होती है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है। देवी दुर्गा के कई रूप हैं जैसे सावित्री, लक्ष्मी एव पार्वती इत्यादि। इनका मुख्य रूप “गौरी” है, अर्थात गोरा, शान्तमय और सुन्दर रूप। उनका सबसे विकराल रूप “काली” का है, अर्थात काला रूप। दुर्गा कई रूपों में भारत और नेपाल के मन्दिरों और तीर्थस्थानों में पूजी जाती हैं। भगवती दुर्गा की सवारी शेर है। ये देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते है। ये शस्त्रास्त्र इनके शौर्य का प्रतिक है। माता ने अपने इस स्वरुप में महिषासुर का वद्ध किया था। अतः इन्हें महिषासुरमर्दनी कहा जाता है। ऐसे महान देवी के महान महिमा का वर्णन है इस “दुर्गा आरती – अम्बे तू है जगदम्बे काली (Durga Aarti – Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)” में ।
