नवरात्रि, दुर्गा पूजा और नवदुर्गा (Navratri, Durga Puja, Navdurga)
नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा माता के विभिन्न नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। जिन नौ रूपों की पूजा की जाती है उसे नवदुर्गा कहा जाता है। नवदुर्गा के नौ रूप जिसे चैत्र माह और अश्विन माह के प्रतिपदा से नवमी तक पूजा जाता है वो क्रमशः निम्नलिखित हैं।
माता दुर्गा अपनी निर्मल चेतना से सृष्टि के संचालन में आये व्यवधान को दूर करने के लिए अपना रूप बदलती गयीं और सभी नाम ग्रहण करतीं गयी।
देवी माँ की असीम कृपा से सत्य (धर्म ) का असत्य (अधर्म ) पर जीत हुई जिसके परिणाम स्वरुप इस नौ दिन की नवरात्री का पर्व पुरे हर्षोल्लास से मनाई जाती है। ये नौ दिन माता के नौ अलग अलग रूपों को समर्पित है। इन्ही नौ रूपों को नवदुर्गा कहा जाता है।
शक्ति तो इस संसार के कण कण में है परन्तु जो अपने शक्ति का उपयोग संसार की भलाई के लिए करता है वो देव या देवता तुल्य हैं। और जो अपने शक्ति का उपयोग संसार के विनाश के लिए करता है वो दानव कहलाता है।
जब भी दानवीय तत्व इस संसार को अपने अधीन में करने का कोशिश किया तब देवी माता शक्ति रूप धारण कर उस दुष्ट आत्मा का संहार करती गयी ।
।। या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।
अर्थ : हे देवी आप शक्ति रूप में हमेशा संसार की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। आप हमारा कोटि कोटि प्रणाम स्वीकार करें।
शक्ति की उपासना का यह महापर्व सनातन काल से माता रानी के नौ शक्ति रूपों की नवधा भक्ति के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि सबसे पहले भगवान राम ने रावण युद्ध के दौरान देवी के शक्ति रूप की आराधना समुद्र किनारे प्रतिपदा के दिन शुरू की थी और उसके दसवें दिन रावण वद्ध के साथ युद्ध की समाप्ति कर विजय प्राप्त किए । तभी से ही नवरात्री का यह महान त्यौहार मनाने का प्रचलन है। आदि शक्ति जगदम्बा के अलग अलग रूप का नौ दिन तक विधि पूर्वक वत पूजा की जाती है।
- सिद्धिदात्री स्वरुप (Siddhidatri Swarup)
- महागौरी स्वरुप (Mahagauri Swarup)
- कालरात्रि स्वरुप (Kalratri Swarup)
- कात्यायनी स्वरुप (Katyayani Swarup)
- स्कंदमाता स्वरुप (Skandmata Swarup)
- कूष्माण्डा स्वरुप (Kushmanda Swarup)
- चन्द्रघंटा स्वरुप ( Chandraghanta Swarup )
- ब्रह्मचारिणी स्वरुप ( Brahmcharini Swarup )
- शैलपुत्री स्वरुप (Shailputri Swarup )
