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महागौरी स्वरुप (Mahagauri Swaroop)

Pt. Ram Chandra 7 वर्ष ago
mahagauri

नव दुर्गा के आठवां स्वरुप महागौरी स्वरुप (Mahagauri Swaroop)

नवरात्रि के आठवें दिन देवी के महागौरी स्वरुप की पूजा की जाती है। नवदुर्गा का यह रूप अमोघ फलदायिनी है। जैसा की नाम से ही स्पष्ट है माता अपने इस रूप में गौर वर्ण की हैं। इनकी वर्ण की तुलना शंख , स्वेत कुंद की पुष्प व चन्द्रमा से की जाती है।

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः |
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ||

माता चार भुजा धारी हैं। एक हाथ में त्रिशूल , एक हाथ में डमरू, एक हाथ वरमुद्रा में और एक अभय मुद्रा में है। बैल पर सवार हैं।
इस माता की उपासना नवरात्रि के आठवें दिन करने से मनुष्य का सभी पाप धूल जाते हैं। वह भविष्य में भी पाप, दुःख उसके पास नहीं आते।
अष्टमी के दिन सुहागिन महिला अपने सुहाग की रक्षा के लिए माता को चुनरी, चावल, हल्दी, पैसा , श्रृंगार एवं सुहाग सामग्रीयां भेंट करती हैं।

माता की कथा इस प्रकार है

भगवान महादेव को वर के रूप में पाने के लिए महागौरी ने बहुत कठिन तपस्या किया था।  परन्तु महादेव उनको देखकर कुछ ऐसा बोल दिए जिससे वो बहुत दुखी हुईं और वर्षों तक घोर तपस्या करती रहीं । इधर महादेव देवी को खोजते तपस्या स्थल पहुंचे पाया कि पार्वती जी का रंग अत्यंत ओजपूर्ण चांद जैसा श्वेत और कुन्द पुष्प के समान धवल हो गया है। महादेव प्रसन्न होकर महागौरी को गौर वर्ण प्रदान करते हैं।

एक दूसरे कथा के अनुसार महादेव की चाहत में पार्वती इतनी कठिन तपस्या की थी जिससे सारा शरीर काला पर गया। शिव तपस्या से खुश हुए। और शरीर को गंगा जल से धोते ही शरीर अत्यंत कांतिपूर्ण गौर वर्ण की हो जाती है। तभी माता का नाम महागौरी परा । इस रूप में माता शांत मृदुल और करुणामयी हैं।
इस रूप की प्रार्थना निम्नलिखित मन्त्र से करना चाहिए।

सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।

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Tags: Durga Durga Puja Navdurga Navratri

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