Skip to content
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Tumblr
  • Blogger
Sanatan Bhakti Sangrah

सनातन भक्ति

हिन्दुत्व एक सर्वोत्कृष्ट जीवनशैली है।

Primary Menu
  • होम
  • कहानी संग्रह
  • स्तोत्र संग्रह
  • चालीसा संग्रह
    • श्री हनुमान चालीसा
    • श्री शिव चालीसा
    • श्री गणेश चालीसा
    • श्री राम चालीसा
    • श्री शनि चालीसा
    • श्री दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)
    • श्री लक्ष्मी चालीसा ( Lakshmi Chalisa)
    • श्री सरस्वती चालीसा
    • श्री साँई चालीसा
    • और भी चालीसा देखें >>
  • आरती संग्रह
  • व्रत कथा
  • श्री राम शलाका प्रश्नावली
  • Baby Name
  • About Us
  • Login
  • Home
  • Editor Story
  • शनि देवजी की आरती (Shri Shani Dev Ji Ki Aarti)
  • Aarti
  • Editor Story

शनि देवजी की आरती (Shri Shani Dev Ji Ki Aarti)

Pt. Ram Chandra 7 वर्ष ago
Shani Dev ki Aarati

शनिदेव की पूजा, शनि देव की आरती (Shani Dev Ki Aarti) और शनि देव की व्रत कथा करना एक प्रमुख धार्मिक परंपरा है जो शनिवार को किया जाता है। शनि देव को भारतीय ज्योतिष शास्त्र में सबसे महत्वपूर्ण ग्रहों में से एक माना जाता है। शनि ग्रह को कर्म, न्याय, धर्म, नियम, और संयम का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, उनकी पूजा, व्रत, और आरती करने से उनके प्रकोप से बचाव होता है और जीवन में स्थिरता, समृद्धि, और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

शनिदेव की पूजा और व्रत कथा का महत्व विभिन्न पौराणिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णित किया गया है। शनि देव की कथा में उनके धर्मपत्नी माता आदि के साथ उनके लीलाएं और दया भाव के उदाहरण होते हैं। व्रत के दौरान भक्त शनि देव के प्रति अपनी विशेष भक्ति और समर्पण का प्रदर्शन करते हैं।

शनि देव की आरती (Shani Dev Ki Aarti) का पाठ कर भक्त अपने अशुभ प्रभावों को दूर करने और शुभ फल प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। आरती के पाठ से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और उनकी क्रोधाग्नि से रक्षा होती है।

शनिदेव की आरती हर शनिवार को भक्त अपने जीवन में स्थिरता, सफलता, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए करते हैं। इससे वे शनिदेव की कृपा और दया भाव को प्राप्त कर सकते हैं।

इसलिए, शनिदेव की पूजा, व्रत कथा, और आरती का पाठ करना एक उत्तम धार्मिक कार्य है जो भक्तों को उनके दया और आशीर्वाद से लाभान्वित करता है।

शनि देव की आरती (Shri Shani Dev Ki Aarti)

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय.॥

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय.॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय.॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥जय.॥

Shani Chalisa

Shani Dev Ki Vrat Katha

Dasharath Krit Shani Stotra

Shani Grah Shanti ke Aasan Upay

Bholenath Par Shani Ka Prakop

Tags: Shani Dev Ki Aarti शनि देवजी की आरती

Continue Reading

Previous: शिवजी की आरती – जय शिव ओंकारा (Shri Shiv Ji Ki Aarti – Jai Shiv Omkara)
Next: श्री रामचन्द्रजी की आरती (Shri Ram Chandra Ji Ki Aarati)

हाल के पोस्ट

  • बिल्वाष्टकम् स्तोत्रम् (Bilvashtakam Stotram)
  • 51 शक्तिपीठों की सूची और संक्षिप्त विवरण
  • महाकुंभ: इतिहास, महत्व और आयोजन की जानकारी
  • खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Aarti)– महत्व, विधि और लाभ
  • Ram Shalaka Prashnavali – Divine Blessings of Ram
  • एक अनसुलझे प्रश्न – ईश्वर अर्थात भगवान (Bhagwan), क्या है और कौन है ?
  • श्री साईं बाबा के 11 वचन अर्थ सहित (Sai Ke 11 Vachan)
  • 10 Expert Tips for Choosing the Perfect Name for Your Baby
  • राम नाम की महिमा (Ram Naam ki Mahima)
  • हनुमान चालीसा के विधि पूर्वक 100 पाठ करने से लाभ

Category

  • Home
  • Chalisa
  • Aarti
  • Stories
  • Stotra
  • Stories
  • Aarti
  • Stotra
  • Chalisa
  • vrat katha
  • Editor Story
  • Main Story
  • Ram
  • Baby Name
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service
  • Babynames
  • 10 Beautiful Baby Girl Names That Mean Lucky or Blessed
  • Top 25 Trending Boy Names in India for 2025
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Tumblr
  • Blogger
Copyright © All rights reserved. | SnatanBakti.com