Skip to content
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Tumblr
  • Blogger
Sanatan Bhakti Sangrah

सनातन भक्ति

हिन्दुत्व एक सर्वोत्कृष्ट जीवनशैली है।

Primary Menu
  • होम
  • कहानी संग्रह
  • स्तोत्र संग्रह
  • चालीसा संग्रह
    • श्री हनुमान चालीसा
    • श्री शिव चालीसा
    • श्री गणेश चालीसा
    • श्री राम चालीसा
    • श्री शनि चालीसा
    • श्री दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)
    • श्री लक्ष्मी चालीसा ( Lakshmi Chalisa)
    • श्री सरस्वती चालीसा
    • श्री साँई चालीसा
    • और भी चालीसा देखें >>
  • आरती संग्रह
  • व्रत कथा
  • श्री राम शलाका प्रश्नावली
  • Baby Name
  • About Us
  • Login
  • Home
  • Stories
  • क्या आप जानते हैं – हनुमानजी भगवान राम के ही भाई थे
  • Stories

क्या आप जानते हैं – हनुमानजी भगवान राम के ही भाई थे

Pt. Ram Chandra 7 वर्ष ago

हनुमानजी, भगवान राम के ही भाई थे

राम के परम भक्त हनुमानजी की भक्ति और श्रद्धा के बारे में सभी जानते हैं। वे दोनों भक्त और भगवान का पवित्र रिश्ते से जुड़े हुए हैं । भक्त शिरोमणि हनुमानजी की भक्ति भाव तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। लेकिन आज हम जानेंगे उन दोनों के बीच का अतुल्य भक्ति भाव वाले रिश्ते से अलग एक और रिश्ता के बारे में। और वो रिश्ता है भाई का रिश्ता।  जानें कैसे हैं श्री राम और हनुमानजी एक दूसरे के भाई।

रामायण में उल्लिखित एक कथा के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ के तीन पत्नियां महारानी कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी थीं । परन्तु संतान एक भी नहीं था। वो निः संतान होने के कारण अत्यधिक दुखी रहते थे। तब उनके कुल गुरु मुनि वशिष्ठ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करने की आज्ञा दी। गुरु के आज्ञा अनुसार राजा दशरथ ने ऋषि श्रृंग को यज्ञ कराने के लिए आमंत्रित किया। पवित्र पुत्रेष्टि यज्ञ के पूर्णाहुति पर अग्निदेव हवनकुंड से प्रकट हुए। अग्निदेव के हाथ में एक सोने का कटोरा था जिसमे दिव्य खीर भरी हुई थी। उन्होंने दिव्य खीर से भरा कटोरा राजा दशरथ के हाथ में देते हुए बोले – हे राजन, देवगण आप के यज्ञ से प्रसन्न होकर यह दिव्य खीर दिए हैं। आप अपनी रानीयों को ये खीर खिला दीजिए इससे आप को सुन्दर पुत्रों की प्राप्ति होगी। ये कह अग्निदेव अंतर्ध्यान हो गए।

राजा दशरथ ने दिव्य खीर अगनिदेव से लेकर पहले रानी कौशल्या, फिर रानी सुमित्रा और सबसे बाद में रानी कैकयी को दिए। सबसे पश्चात दिव्य खीर मिलने से देवी कैकयी राजा दशरथ पर अति क्रोधित हुईं। उसी क्षण एक चील भगवान शंकर की महिमा से वहां आई और कैकई के हाथ से खीर लेकर उस पर्वत के तरफ चली गयी जहां माता अंजनी तपस्या कर रही थी। वहां पहुंच चील खीर का कटोरा माता अंजनी के हाथ में गिरा दिया। तभी ही अंजनी भी यह प्रसाद ग्रहण कर ली और राजा दशरथ के तीनों रानीयों की तरह वह भी गर्भवती हो गयी।

प्रभु की कृपा से राजा दशरथ के यहाँ चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। और देवी अंजनी के गर्भ से भी एक विलक्षण बालक का जन्म हुआ। जो बाद में हनुमान कहलाया। अतः एक ही दिव्य खीर के प्रभाव से जन्म लिए भगवन राम और हनुमान में भाई का रिश्ता भी माना जाता है।

Hanuman Chalisa

Hanuman Ji Ki Aarati

Hanuman Ram Yuddh

 Kaise Bhule Hanuman Ji Apani Shakti

Tags: hanuman Ram

Continue Reading

Previous: हनुमान जी ने किया प्रभु श्री राम के विरुद्ध युद्ध का संचालन किया
Next: भगवान गणेश की जन्म कथा

हाल के पोस्ट

  • बिल्वाष्टकम् स्तोत्रम् (Bilvashtakam Stotram)
  • 51 शक्तिपीठों की सूची और संक्षिप्त विवरण
  • महाकुंभ: इतिहास, महत्व और आयोजन की जानकारी
  • खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Aarti)– महत्व, विधि और लाभ
  • Ram Shalaka Prashnavali – Divine Blessings of Ram
  • एक अनसुलझे प्रश्न – ईश्वर अर्थात भगवान (Bhagwan), क्या है और कौन है ?
  • श्री साईं बाबा के 11 वचन अर्थ सहित (Sai Ke 11 Vachan)
  • 10 Expert Tips for Choosing the Perfect Name for Your Baby
  • राम नाम की महिमा (Ram Naam ki Mahima)
  • हनुमान चालीसा के विधि पूर्वक 100 पाठ करने से लाभ

Category

  • Home
  • Chalisa
  • Aarti
  • Stories
  • Stotra
  • Stories
  • Aarti
  • Stotra
  • Chalisa
  • vrat katha
  • Editor Story
  • Main Story
  • Ram
  • Baby Name
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service
  • Babynames
  • 10 Beautiful Baby Girl Names That Mean Lucky or Blessed
  • Top 25 Trending Boy Names in India for 2025
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Tumblr
  • Blogger
Copyright © All rights reserved. | SnatanBakti.com