हनुमान जी भूले अपनी शक्ति (Hanuman forgot his power) : Story for Children in Hindi
यह हनुमान के बचपन की कहानी ( story ) है। वैसे तो बच्चों (Children) का शरारती होना आम बात है परन्तु हनुमान का बचपन कुछ ज्यादा ही नटखटपन और शरारतों से भरा परा था। वह बचपन (childhood) से ही बहुत शक्तिशाली थे । वो अपनी शक्ति का उपयोग ऋषियों को परेशान करने में किया करते थे । ऋषियों के कुटी में जाकर उन्हें परेशान करने में बालक हनुमान को बहुत आनंद आती थी । तपस्या कर रहे ऋषियों का बाल खींचना, पूजा में बिघ्न डालना, पूजा की चीजें छीनना उनका प्रति दिन का काम था ।
पहले तो ऋषियों ने उसे अनदेखा करने की कोशिश की लेकिन बाद में वे उसकी महान ताकत से बहुत थक गए और हनुमान को एक छोटा श्राप देकर उसे दंडित करने का फैसला किया ।
ऋषि तो ज्ञानी थे। वे अपने दिव्य दृष्टि से जान चुके थे कि हनुमान एक असाधारण बालक है। वह एक अलौकिक शक्ति का मालिक है और प्रभु श्री राम की सेवा में वो अपनी सारी शक्ति का इस्तेमाल करने वाला है। अतः उन्होंने फैसला किया कि हमें उसे अपने ताकत को भूलने का श्राप देना चाहिए। और जब कोई उसे याद दिलाएगा कि वो महान शक्ति का मालिक है तभी उसे अपना ताकत याद आएगा। और फिर ऋषि ने हनुमान को ताकत भूलने का श्राप दे दिया।
बाद में सीता का पता लगाने लंका जाते समय समुद्र पार करने के लिए जामवंत जी ने (जो एक भालू थे ) हनुमान जी को अपनी शक्ति याद दिलाई। तभी जाकर उन्होंने समुद्र पार कर पाए और सीता माता का पता लगा पाए।
