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मोहिनी एकादशी व्रत के नियम (Mohini Ekadashi Vrat Vidhi )

Pt. Ram Chandra 7 वर्ष ago
ekadashi vrat ke niyam

मोहिनी एकादशी व्रत के नियम (Mohini Ekadashi Vrat Vidhi )

वैशाख मास के शुक्लपक्ष के एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाय जाता है। मोहिनी एकादशी के दिन व्रत (Mohini Ekadashi Vrat) रख कर भगवान विष्णु की आराधना करने से धन – सम्पति में वृद्धि होती है और जीवन में सुख – शांति की प्राप्त होती है।

स्कंद पुराण के अवंतिका खंड के अनुसार इस दिन समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत का वितरण देवताओं के बीच किया गया था। भगवान विष्णु ने मोहिनी रूपधारण कर अवंतिका नगरी में अमृत का बंटवारा किया था। देवासुर संग्राम के दौरान राक्षसों को चकमा देने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और देवों को अमृत पान करवाया। देवासुर संग्राम का अंत मोहिनी एकादशी के दिन ही हुआ था।

एकादशी के व्रत में एक दिन पहले यानी दशमी के दिन से ही इसके नियमों का पालन करना परता है। ऐसा करने से व्रती को मनोवांछित फल प्राप्त होता है और व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।

एकादशी व्रत के नियम –

-एकादशी के पहले दिन यानि दशमी तिथि के दिन मसूर की दाल, मांस, मछली, मदिरा, प्याज, लहसुन इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए।

– दो दिन (दशमी और एकादशी ) ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए

– एकादशी के दिन दातुन न करें, सुबह नींबू, जामुन या आम के पत्ते चबा कर एवं अपने अंगुली से दांत, जिह्वा साफ कर लें। इस दिन वृक्ष से पत्ता तोड़ना वर्जित है इस‍लिए निचे गिरा हुआ पत्ता का उपयोग करें।

– एकादशी व्रत वाले दिन किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए। क्रोध नहीं करें और हमेशा मधुर वाणी बोलें जिससे किसी का दिल न दुखे।

– तत्पश्चात ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का १०८ बार जाप करें। संभव हो तो विष्णु के सहस्रनाम का पाठ करें। संध्या काल एकादशी माता की आरती करें।

– यदि भूलवश भी किसी की निंदा न करें। भगवान विष्णु की पूजा करके अज्ञानता वश हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें।

– इस दिन बाल नहीं कटवाएं। कम बोलने का प्रयास करें।

– इस दिन यथा‍ संभव दान – पुण्य करना चाहिए।

– आम, अंगूर, केला, बादाम, अखरोट आदि अमृत फलों का सेवन कर सकते हैं।

– एकादशी के दिन व्रती के लिए गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन निषेध है .

– कुछ भी ग्रहण करने से पहले उसमे तुलसीदल डालकर भगवान विष्णु का भोग लगाएं फिर खुद ग्रहण करें

– द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन करा कर दक्षिणा दें। फिर भोजन ग्रहण करें।

– इस व्रत को विधान पूर्वक करने से सभी मनोकामना पूर्ण होता है और जीवन के सभी कष्‍ट दूर होते हैं। अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Tags: Ekadashi Vrat

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