बुधवार का दिन हैं भगवान गणेश की का दिन माना जाता हैं। महादेव एवं पार्वती के प्रिय पुत्र श्री गणेश एक ऐसे देव हैं जिनका महत्व सभी देवों में विशेष माना जाता है जिसके फलस्वरूप किसी भी पूजा से पहले श्री गणेश की पूजा की जाती हैं। श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है। इनकी पूजा करने के बाद गणेश आरती (Ganesh Aarati) अवश्य करना चाहिए।
गणेश जी की आरती (Ganesh Ji ki Aarati)
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय…
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय…
हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय…
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ जय…
गणपति आरती (Ganapati Aarati)
भगवान गणेश की आरती का महत्व हिन्दू धर्म में अत्यधिक है, और इसे गणपति आरती भी कहा जाता है। गणेश जी हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता हैं, जिन्हें विद्या, बुद्धि, और समृद्धि के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। इसलिए, गणपति आरती का गाना और सुनना भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गणेश आरती का गायन उसके भक्तों को उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। यह आरती भक्तों को शांति, सुकून और ध्यान में स्थिति की अनुभूति कराती है और उन्हें गणेश जी के साथ एक अद्वितीय और साकार संबंध में ले जाती है।
गणेश आरती का पाठ भक्तों को बुद्धि, बल, और बूढ़े बालों के प्रति कृपा का अनुभव कराता है। यह आरती सुनने से व्यक्ति अपने जीवन में सफलता और सुख-शांति की ओर बढ़ने का संकेत महसूस करता है।
गणेश आरती का गायन सभी प्रार्थनाओं और पूजाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भक्तों को उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए गणेश जी से आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है।
गणेश आरती का पाठ और सुनना धार्मिक सामर्थ्य को बढ़ाता है और भक्तों को भगवान गणेश के साथ एक विशेष संबंध बनाए रखने में मदद करता है। इसके माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करता है और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है।
समर्पण और श्रद्धा के भाव के साथ गणेश आरती का पाठ करना भक्तों को आत्मिक एवं मानवीय समृद्धि की प्राप्ति के लिए एक साधना सिद्ध करता है। इसका अभ्यास करने से भक्त अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव और उत्तम संस्कृति की ओर बढ़ता है।
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