Skip to content
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Tumblr
  • Blogger
Sanatan Bhakti Sangrah

सनातन भक्ति

हिन्दुत्व एक सर्वोत्कृष्ट जीवनशैली है।

Primary Menu
  • होम
  • कहानी संग्रह
  • स्तोत्र संग्रह
  • चालीसा संग्रह
    • श्री हनुमान चालीसा
    • श्री शिव चालीसा
    • श्री गणेश चालीसा
    • श्री राम चालीसा
    • श्री शनि चालीसा
    • श्री दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)
    • श्री लक्ष्मी चालीसा ( Lakshmi Chalisa)
    • श्री सरस्वती चालीसा
    • श्री साँई चालीसा
    • और भी चालीसा देखें >>
  • आरती संग्रह
  • व्रत कथा
  • श्री राम शलाका प्रश्नावली
  • Baby Name
  • About Us
  • Login
  • Home
  • Stotra
  • दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Dasharath Krit Shani Stotra)
  • Stotra

दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Dasharath Krit Shani Stotra)

Pt. Ram Chandra 7 वर्ष ago
Shani Stotra

दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Dasharath Krit Shani Stotra)

शनि ग्रह, साढ़े साती या शनि ढैया चाहे किसी भी प्रकार का शनि की दशा या महादशा हो इस दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Dasharath Krit Shani Stotra) का प्रत्येक शनिवार कम से कम 11 वार पाठ करना चाहिए। इस स्तोत्र की रचना स्वयं महाराजा दशरथ ने अपने ऊपर शनि के प्रभाव को कम करने के लिए किया था। भगवान शनि ने उनको वरदान दिए थे की जो भी व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ करेगा वो हमारे द्वारा होने वाले परेशानी से बच पायेगा। स्वयं राजा दशरथ भी इसका नियमित पाठ करते थे।

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।१।।
नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।२।।
नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।३।।
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम: ।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।४।।
नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च ।।५।।
अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते ।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।६।।
तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च ।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम: ।।७।।
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे ।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ।।८।।
देवासुरमनुष्याश्च सिद्घविद्याधरोरगा: ।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।९।।
प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत ।
एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल: ।।१०।।

Tags: shani shani dhaiya shani mhadasha shani sadhe sati

Continue Reading

Previous: एक श्लोकी रामायण (Ek Shloki Ramayana) – दो पंक्ति के श्लोक में सम्पूर्ण रामायण
Next: बजरंग बाण (Bajarang Baan in Hindi)

हाल के पोस्ट

  • बिल्वाष्टकम् स्तोत्रम् (Bilvashtakam Stotram)
  • 51 शक्तिपीठों की सूची और संक्षिप्त विवरण
  • महाकुंभ: इतिहास, महत्व और आयोजन की जानकारी
  • खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Aarti)– महत्व, विधि और लाभ
  • Ram Shalaka Prashnavali – Divine Blessings of Ram
  • एक अनसुलझे प्रश्न – ईश्वर अर्थात भगवान (Bhagwan), क्या है और कौन है ?
  • श्री साईं बाबा के 11 वचन अर्थ सहित (Sai Ke 11 Vachan)
  • 10 Expert Tips for Choosing the Perfect Name for Your Baby
  • राम नाम की महिमा (Ram Naam ki Mahima)
  • हनुमान चालीसा के विधि पूर्वक 100 पाठ करने से लाभ

Category

  • Home
  • Chalisa
  • Aarti
  • Stories
  • Stotra
  • Stories
  • Aarti
  • Stotra
  • Chalisa
  • vrat katha
  • Editor Story
  • Main Story
  • Ram
  • Baby Name
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service
  • Babynames
  • 10 Beautiful Baby Girl Names That Mean Lucky or Blessed
  • Top 25 Trending Boy Names in India for 2025
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Tumblr
  • Blogger
Copyright © All rights reserved. | SnatanBakti.com