श्री बांके बिहारी की आरती (Banke Bihari Ki Aarti) करने से बहुत पुण्य प्राप्त होता है। आरती से पहले बांके बिहारी के बारे में संक्षिप्त विवरण उद्धृत है। जाने अपने पूज्य बांके बिहारी के बारे में।
श्री बांके बिहारी मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के पवित्र शहर वृंदावन में भगवान कृष्ण को समर्पित है। बांके बिहारी मंदिर की स्थापना द्वापर युग में स्वामी हरिदास द्व्रारा की गयी थी। स्वामी हरिदास प्रसिद्ध गायक तानसेन के गुरु थे। एक बार अपने शिष्यों के अनुरोध पर स्वामी हरिदास जी ने वृंदावन के निधिवन में ये राग गए ।
“माई री, सहज जोरी प्रगट भई, जु रंग की गौर-स्याम घन-दामिनि जैसैं।
प्रथम हूँ हुती, अब हूँ आगें हूँ रहिहै, न टरिहै तैसैं॥
अंग-अंग की उजराई-सुघराई-चतुराई-सुन्दरता ऐसैं।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा-कुंजबिहारी, सम वैस वैसैं॥”
पद्य गाने पर, उनके और उनके भक्तों के सामने आकाश में युगल श्यामा-श्याम (राधा कृष्ण) प्रकट हुए। श्री स्वामी जी के अनुरोध पर दंपति एक में विलीन हो गए और बांके बिहारी की मूर्ति वहाँ प्रकट हुई। मूर्ति की स्थापना निधिवन में की गई थी।
भक्तों की इच्छा को पूरा करते हुए, भगवान अपने दिव्य शक्ति से एक व्यक्ति के रूप में प्रकट हुए और गायब होने से पहले एक काले आकर्षक छवि को वापस छोड़ दिया।
बांके बिहारी श्री राधा कृष्ण अनंत प्रेम का एक प्रतिक हैं। इस मंदिर में भक्त जो भी श्रद्धा के साथ बांके बिहारी से मांगता है वो अबश्य पूरा होता है।
श्री बाँकेबिहारी की आरती
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
कुन्जबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
मोर मुकुट प्रभु शीश पे सोहे।
प्यारी बंशी मेरो मन मोहे।
देखि छवि बलिहारी जाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी।
जिसने सारी दुनिया तारी।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
दास अनाथ के नाथ आप हो।
दुःख सुख जीवन प्यारे साथ हो।
हरि चरणों में शीश नवाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
श्री हरि दास के प्यारे तुम हो।
मेरे मोहन जीवन धन हो।
देखि युगल छवि बलि-बलि जाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
आरती गाऊँ प्यारे तुमको रिझाऊँ।
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ।
श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
