कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं अपने पुत्र की लंबी आयु और उसको किसी अनहोनी से बचाने की कामना करती हैं। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करके निर्जला व्रत रखती हैं। इस पवित्र व्रत पूजा में अहोई माता की कथा एवं आरती (Ahoi Mata Ki Aarti) जरूर करना चाहिए। अहोई माता की आरती (Ahoi Mata Ki Aarti) के विधिवत गायन और आरती करने से माता की विशेष कृपा बनी रहती है।
आरती अहोई माता की (Ahoi Mata Ki Aarti)
जय अहोई माता, जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता॥
जय अहोई माता॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता॥
जय अहोई माता॥
माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता॥
जय अहोई माता॥
तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता॥
जय अहोई माता॥
जिस घर थारो वासा वाहि में गुण आता।
कर न सके सोई कर ले मन नहीं धड़काता॥
जय अहोई माता॥
तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता॥
जय अहोई माता॥
शुभ गुण सुंदर युक्ता क्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकू कोई नहीं पाता॥
जय अहोई माता॥
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता॥
जय अहोई माता॥
भारतीय समाज में अहोई माता के पूजा आरती (Ahoi Aarti) का महत्व
अहोई माता (Ahoi Mata) भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण देवी मानी जाती है। वह उत्तर भारतीय राजस्थान और पंजाब के क्षेत्र में विशेष रूप से इनकी पूजा और फिर आरती का विशेष महत्व है। अहोई माता को भूमि और कृषि की रक्षिता के रूप में जाना जाता है।
अहोई माता (Ahoi Mata) का पूजन नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से किया जाता है। उनके मंदिरों में लाखों भक्तों की भीड़ उनकी कृपा की प्राप्ति के लिए आती है।
अहोई माता (Ahoi Mata) का मंदिर राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित है, जो भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
इस माता को लोग गायों की देवी के रूप में पूजते हैं, जो कृषि और खेती के संबंध में महत्वपूर्ण हैं।
अहोई माता (Ahoi Mata) के पूजन और आरती में समुद्री चावल, दही, गाय के घी, चीनी, फल, और फूल उपहार के रूप में चढ़ाए जाते हैं।
इन्हें माता का बड़ा त्योहार माना जाता है, जिसे समाज के सदस्य उत्साहपूर्वक मनाते हैं।
अहोई माता की कथाएं (Ahoi Mata ki katah) और उनका महत्व धार्मिक शास्त्रों में विस्तार से वर्णित किया गया है।
अहोई माता की पूजा और आरती (Ahoi Aarti) का पावन अनुभव भक्तों को आत्मिक शांति और संतोष का अनुभव कराता है।
उनकी कृपा से लोग विभिन्न संकटों से मुक्ति प्राप्त करते हैं और उनकी कृपा और आशीर्वाद से जीवन में समृद्धि और खुशहाली का अनुभव करते हैं।
यह भी देखें :-
आरती संग्रह
चालीसा संग्रह
व्रत कथा संग्रह
धार्मिक कहानियाँ
