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आरती श्री गंगा जी (Ganga Aarti)

Pt. Ram Chandra 7 वर्ष ago
Ganga Mata Aarti

हिन्दू धर्म में गंगा नदी को एक देवी का दर्जा प्राप्त है लोग इन्हें गंगा माता व गंगा मैया के नाम से जानते हैं। गंगा माता सभी पापों को नष्ट कर, मनुष्य को मोक्ष के द्वार तक पहुंचती हैं । ऐसे माता का आरती करना मनुष्य के लिए सौभाग्य की बात है। इस गंगा माता आरती (Ganga Aarti) का पाठ करने से मोक्षदायनी गंगा माता की कृपा बनी रहती है।

आरती श्री गंगा जी (Ganga Aarti)

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।

जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।

शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।

कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता।

यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता।

सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता॥

ॐ जय गंगे माता॥

-: समाप्त :-

गंगा नदी, एशिया महादेश के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में 1500 मील से अधिक की दूरी में फैली हुई है, शायद विश्व में सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक जल श्रोत है। गंगा नदी को आध्यात्मिक रूप से पवित्र माना जाता है।

यह उत्तर भारत में हिमालय के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलकर, भारत के दक्षिण-पूर्व में बांग्लादेश से होते हुए, बंगाल की खाड़ी तक बहती है। भारतीयों लिए यह जल का सबसे बड़ा स्रोत है – जिसका उपयोग पीने, स्नान करने और फसलों की सिंचाई के लिए किया जाता है – 400 मिलियन से अधिक लोगों को फायदा पहुंचती है यह नदी।

हिंदुओं के लिए, गंगा नदी माँ के समान पवित्र और पूज्यनीय है, जिसे देवी गंगा , गंगा माता, गंगा मैया व गंगा माँ से सम्बोधन किया जाता है।
गंगा नदी के किनारे या उसके पानी में किए गए किसी भी अनुष्ठान से भाग्योदय होता है और सभी अशुद्धता व नकारात्मकता दूर होती है। गंगाजल को अमृत समान पवित्र माना गया है।

पुराणों – प्राचीन हिंदू शास्त्रों अनुसार,गंगा नदी के दर्शन, नाम लेने व गंगाजल के स्पर्श मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और इस पवित्र नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मोक्षदायनी माता को प्रसन्न करने के लिए उपरोक्त गंगा आरती (Ganga Aarti) का पाठ करना चाहिए।

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