यह चित्रगुप्त आरती (Chitragupt Aarti), भगवान चित्रगुप्त की पूजा में पाठ किया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार संपूर्ण विश्व के सृष्टिकर्ता भगवान ब्रम्हा हैं । भगवान ब्रम्हा ने सबसे पहले अपने शरीर के विभिन्न हिस्सों से 16 पुत्र का निर्माण किये। श्री चित्रगुप्तजी उनकी 17 वीं रचना माना जाता है, जो कि भगवान ब्रम्हा के पेट से उत्पन्न हुए थे । श्री चित्रगुप्तजी एक दिव्य अवतार हैं। ये कायस्थ कहलाते है क्योंकि ये भगवान ब्रम्हा के शरीर (काया) से निर्मित है। चित्रगुप्त महाराज कायस्थ जाति (भारत और नेपाल के एक हिंदू जाति) के संरक्षक देवता हैं। कायस्थों (जाति ) को चित्रगुप्त का वंशज बताया जाता है। भगवान चित्रगुप्त (छिपी हुई तस्वीर) को पृथ्वी पर मनुष्यों के कार्यों का पूरा रिकॉर्ड रखने का कार्य सौंपा गया है। वह न्याय के देवता हैं। मनुष्य की मृत्यु के पश्चात, उसके द्वारा जीवन में किये गए कार्यों के आधार पर, भगवान् चित्रगुप्त उसको स्वर्ग या नरक तय करते हैं ।
श्री चित्रगुप्त जी की आरती (Chitragupt Ji Ki Aarti)
ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
भक्त जनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी।
भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै।
मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण, प्रभु अन्तर्यामी।
सृष्टि संहारण, जन दु:ख हारण, प्रकट हुये स्वामी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
कलम, दवात, शङ्ख, पत्रिका, कर में अति सोहै।
वैजयन्ती वनमाला, त्रिभुवन मन मोहै॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
सिंहासन का कार्य सम्भाला, ब्रह्मा हर्षाये।
तैंतीस कोटि देवता, चरणन में धाये॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
नृपति सौदास, भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा।
वेगि विलम्ब न लायो, इच्छित फल दीन्हा॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
दारा, सुत, भगिनी, सब अपने स्वास्थ के कर्ता।
जाऊँ कहाँ शरण में किसकी, तुम तज मैं भर्ता॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
बन्धु, पिता तुम स्वामी, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
जो जन चित्रगुप्त जी की आरती, प्रेम सहित गावैं।
चौरासी से निश्चित छूटैं, इच्छित फल पावैं॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
न्यायाधीश बैकुण्ठ निवासी, पाप पुण्य लिखते।
हम हैं शरण तिहारी, आस न दूजी करते॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
