बृहस्पतिवार यानी गुरुवार (Thursday) के दिन भगवान बृहस्पति की पूजा अर्चना का दिन होता है। इस दिन बृहस्पति देव की विधिवत पूजा से सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। घर में धन-दौलत की कमी नहीं होती है । जल्द और सफल वैवाहिक जीवन के लिए भी गुरुवार का व्रत एवं कथा (बृहस्पति वार का व्रत कथा ) किया जाता है । कोई पूजा बिना आरती संपन्न नहीं माना जाता है अतः बृहस्पति देव की पूजा या बृहस्पति व्रत में श्री बृहस्पतिवार की आरती (Brihaspativar Ki Aarti) आवश्यक है। भगवान बृहस्पति अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बनाये रखते हैं।
श्री बृहस्पतिवार की आरती (Brihaspativar Ki Aarti)
ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता। सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े। प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी। पाप दोष सब हर्ता, भव बन्धन हारी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो। विषय विकार मिटाओ, सन्तन सुखकारी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे। जेष्टानन्द बन्द सो सो निश्चय पावे॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥
